आज बहुत अच्छा लग रहा है.. हर साल की तरह फिर एक बार सीज़नल पौधे जो आ गये हैं घर मे... अब यादआ रहा है इसी साल मार्च का महिना ... जब पहली बार इस घर को देखने आई थी ...घर तो ठीक ही था बस एक कमी खल रही थी वो था बगीचा.. बगीचे के बिन घर की कल्पना भी करना मेरे लिए असंभव था... अब तीसरी मंजिल के फ्लैट में बग़ीचा ! भला वो कैसे संभव था... तो फिर ...वो ही हुआ जो हर बार होता है ..बाकी सब की इच्छा और सहूलियत देखते हुए मैने भी इस फ्लैट के लिए हां कर दी। बस फिर क्या था दो तीन दिन में ही हम यहां आ गए । हां ,लेकिन साथ में मेरे ४५ गमले भी .. छोटी सी बालकनी में थोड़ी सी जगह इनको भी मिल ही गई ।धीरे धीरे छोटा सा बगीचा तैयार हो रहा था। अब ये जो सीज़नल पौधे आज लगा रही हूं ना... इनके बड़े होने की प्रतीक्षा है। वो मुंडेर पे बैठी चिड़िया भी चहचहा रही है मेरी खुशी में शरीक हो के... हो भी क्यों ना?? उसे मैंने एसी के पीछे अपना घोंसला जो बनाने दिया है..☺️
पुराने बगीचे की कुछ तस्वीरें.
और अब फ्लैट में...